Wednesday, 25 May 2016

Programming Head - Rajasthan Film Festival


घणी खम्मा,राम राम,

राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में विगत वर्षो में प्रोग्रामिंग हैड के पद पे कार्यरत हुँ। 2003 में फिल्म मेकिंग में सेंट्रल गोवेर्मेंट से पास आउट होने के बाद मैँ मेरे होम टाउन जयपुर आ गया और यह आकर राजस्थानी कला एेव संस्कृति से जुड़े ऑडियो - वीडियो ,फिल्में और डॉक्यूमेंटरी करने लगा

इसी दौरान मेरी मुलाकात कंचन कैसेटस की एेम डी संजना शर्मा से हुई और उन्होंने मुझे 2013 में राजस्थान फिल्म फेस्टिवल के प्रोग्रामिंग हेड के पास पर कार्य करने का प्रस्ताव  दिया मेने उनके इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार किया और तब से लेकर आज तक मैं लगातार इस लगातार कार्यरत हुँ। और इस पद की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभा रहा हुँ।  इस पद के लिए मैं सदैव उनका आभारी रहूँगा 

साथ ही ये भी कहना चाहूँगा कि राजस्थान फिल्म फेस्टिवल हम सबका है हमें मिलजुल कर इसे नई उचाईयों की और ले जाना है ।


                                                                                              जय जय राजस्थान
                                                                                                                                                                                                   अनिल कुमार जैन
                                                                                                                                                                                                         प्रोग्रामिंग हेड 

Friday, 6 May 2016

From Business Partner`s Desk

मैं कोई कलाकार तो नहीं हुँ पर कला और कलाकारों की दिल से इज़्ज़त करता हुँ  क्योंकि मुझ कला से बेहद लगाव  है और  जब राजस्थानी कला , संस्कृति एवं सिनेमा की  बात  चलती  है तो  मै खींचा चला आता हुँ। 

मेरे लिए शुरू से ही ये रहा है कि मैं राजस्थानी कला, संस्कृति एंव सिनेमा के लिए कुछ करू और एक दिन मुझे २०१४ के राजस्थान फिल्म फेस्टिवल को देखने का अवसर प्राप्त हुआ।  मेरा मन प्रसन्न हो गया और मैने अगले फेस्टिवल से जुड़ने की ठान ली।  मै संजना जी से मिला उन्हें अपने दिल की बात बताई और उन्होंने मान ली।  बस फिर क्या था मेरे अरमानों के पंख लग गये और मैने अपनी कंपनी सिनेक्स विज़न को कंचन कैसेटस का सहभागी बनाकर २०१५ के राजस्थान फिल्म फेस्टिवल को सफल बनाया।

अब तो दिल सा बस एक ही तमन्ना है कि राजस्थानी कला ,संस्कृति एवं सिनेमा विश्व के कोने-कोने मे फैले और इसके लिये मे हर संभव प्रयास करता रहूँगा।  

जय जय राजस्थान
देवेन्द्र शर्मा (डायरेक्टर)
सिनेक्स विज़न  

Thursday, 28 April 2016

Editorial

मैं अकेली ही चली थी मज़िल - जानिब मगर,
लोग मिलते गये कारवां बनता गया।

मैं राजस्थान में जन्मी, पली- बड़ी इसलिए यहाँ की माटी मेरी रंग रंग में बसी है और राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है जो अपनी कला, संस्कृति, रहन- सनह, रीती- रिवाज़ आदि में विश्व पटल पर अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है, किन्तु हमारा राजस्थानी सिनेमा अन्य क्षेत्रिय सिनेमाओं की तुलना में उनका सुद्रढ नहीं है। काम और प्रोत्साहन के आभाव में प्रतिभाएँ पलायन को विश्व है।

कला जगत मे जुड़ी होना का नाते ये बातें मेरे दिल को चबने लगी और राजस्थानी सिनेमा को मंच पर लाने की ठान ली। फ़लस्वरूप २८ सितम्बर २०१३ को कंचन कैसेट्स के बेनर तले राजस्थान फिल्म फेस्टिवल के रूप मे एक बिरवा रोपा जो आज आप के सहयोग से एक विशाल बरगद की शक्ल मे चूका है। ये तो एक शुरुवात है , मेरी दिली तमन्ना है की राजस्थानी सिनेमा बहुत आगे जाये। अच्छी फिल्मे बने ,यहां स्टूडियो बने, फिल्म सिटी बने, अच्छे इंस्टिट्यूट हो, जिस्म यहाँ कलाकार और तकनीशियन उभर के आये। किसी को मुंबई की तरफ भागना पड़े, हमारी फिल्में दूरदर्शन और अन्य चैनलों पर चले, इन सब बातों का लिए मै ज़िन्दगी भर प्रयास करती रहूंगी और आप सब का साथ इसी तरह से बना रहा तो राजस्थान फिल्म फेस्टिवल का कद ओर बढ़ेगा।

मित्रों किसी भी काम की सफलता के लिए एक मजबूत टीम और सहयोग की आवश्यकता होती है और इस राजस्थान फिल्म फेस्टिवल को खड़ा करने में नीरज खण्डेलवाल और मेरी पूरी टीम का अमूल्य योगदान रहा है, में इन सभी का शुक्रिया अदा करना चाहती हुँ, साथ में यह भी कहना चाहुंगी की हर आयोजन में कुछ कमियाँ रह ही जाती है और मैं हमेशा मेरी कमियों को दूर करने का प्रयास करती हुँ। मेरा उद्देश्य किसी को ठेस पहुंचाना ना होकर राजस्थानी सिनेमा का सम्पूर्ण विकास करना है। मैं इसके लिए सदैव तत्पर रहुंगी।

जय जय राजस्थान





संजना शर्मा
डायरेक्टर
कंचन कैसेट एण्ड सीरीज

Saturday, 23 April 2016

Introduction - Naee Soch Naee Disha

एक परिचय
सिनेमा समाज का दर्पण होता है, उस समय के पहनावे, संस्कृति और बोलचाल का परिचायक होता है।   लोग उसे देखकर अनुसरण करते है, सीखते है, सिनेमा के साथ - साथ भाषा भी अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है और राजस्थानी ११ करोड़ राजस्थानियों की समर्ध भाषा है।

अतः इसी सिनेमा, संस्कृति एवं भाषा का प्रचार- प्रसार करने तथा राजस्थानी सिनेमा से जुड़े कलाकारों को सम्मान प्रदान करने के लिए कंचन कैसेटस एवं सीरीज ने २८ सितंबर २०१३ को राजस्थान फ्लिम फेस्टिवल के रूप में एक अवार्ड समारोह की नीव रखी। जो आज पूर्णत: एक बड़ी इमारत की शक्ल ले चुका है और ये इमारत दिनों-दिन बड़ी होती जा रही है। इसके तहत राजस्थानी सिनेमा से जुड़े सेंकडो कलाकारों को विभिन्न श्रीनियो में पुरस्कृत किया जा चुका है और राजस्थानी सिनेमा की बेहतरी के लिए प्रयास करने वाली कई हस्तियां को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया जा चूका है।

अब यह समारोह दो दिन का होने लगा है। जिसके तहत समारोह के पहले दिन राजस्थानी सिनेमा की दशा एवं दिशा पर एक विशेष परिचर्चा रखी जाती है। इसमें राजस्थानी सिनेमा से जुड़े निर्माता, निर्देशक, लेखक, वितरक, सिनेमा मालिक, तकनीशियन और कलाकारों आदि के साथ विभिन्न कला एव सांस्कृतिक विभागों के पदाधिकारी शामिल होते है और सिनेमा के विभिन्न पहलूओं पर विशेष परिचर्चा की जाती है। अगले दिन विभिन्न केटिगिरिज में कलाकारों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया जाता है। 

इस समारोह के सार्थक परिणाम सामने आये है और सिनेमा में नये प्राणों का संचार हुआ है अब कई बड़े बजट की और अच्छी फिल्मे बनने लगी हैं। लोगो का ध्यान भी राजस्थानी सिनेमा की तरफ बढ़नें लगा हा और सरकार भी इस प्रयासों से  प्रभावित होकर अनुदान राशि से बढाकर १० लाख कर दी है जो राजस्थानी सिनेमा का लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। अब या शुभ संकेत देख कर आभास  होने लगा है की अगर ऐसा ही चलता रहा तो राजस्थानी सिनेमा फिर से उन्हीं उचाईयां को छूने लगेगा और राजस्थानी सिनेमा के भी  अच्छे  दिन जायेंगे।