एक परिचय
सिनेमा समाज का
दर्पण होता है,
उस समय के
पहनावे, संस्कृति और बोलचाल
का परिचायक होता
है। लोग
उसे देखकर अनुसरण
करते है, सीखते
है, सिनेमा के
साथ - साथ भाषा
भी अपना महत्वपूर्ण
स्थान रखती है
और राजस्थानी ११
करोड़ राजस्थानियों की
समर्ध भाषा है।
अतः इसी सिनेमा, संस्कृति
एवं भाषा का प्रचार- प्रसार करने तथा राजस्थानी सिनेमा से जुड़े कलाकारों को सम्मान
प्रदान करने के लिए कंचन कैसेटस एवं सीरीज ने २८ सितंबर २०१३ को
राजस्थान फ्लिम फेस्टिवल
के रूप में एक अवार्ड समारोह की नीव रखी। जो आज पूर्णत: एक बड़ी इमारत की शक्ल ले चुका
है और ये इमारत दिनों-दिन बड़ी होती जा रही है। इसके तहत राजस्थानी सिनेमा से जुड़े सेंकडो
कलाकारों को विभिन्न श्रीनियो में पुरस्कृत किया जा चुका है और राजस्थानी सिनेमा की
बेहतरी के लिए प्रयास करने वाली कई हस्तियां को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर
सम्मानित किया जा चूका है।
अब यह समारोह
दो दिन का
होने लगा है।
जिसके तहत समारोह के
पहले दिन राजस्थानी
सिनेमा की दशा
एवं दिशा पर
एक विशेष परिचर्चा
रखी जाती है।
इसमें राजस्थानी सिनेमा
से जुड़े निर्माता,
निर्देशक, लेखक, वितरक, सिनेमा
मालिक, तकनीशियन और कलाकारों
आदि के साथ
विभिन्न कला एव
सांस्कृतिक विभागों के पदाधिकारी
शामिल होते है
और सिनेमा के
विभिन्न पहलूओं पर विशेष
परिचर्चा की जाती
है। अगले दिन
विभिन्न केटिगिरिज में कलाकारों
को पुरस्कार प्रदान
कर सम्मानित किया
जाता है।
इस समारोह के सार्थक
परिणाम सामने आये है
और सिनेमा में
नये प्राणों का
संचार हुआ है
। अब कई
बड़े बजट की
और अच्छी फिल्मे
बनने लगी हैं।
लोगो का ध्यान
भी राजस्थानी सिनेमा
की तरफ बढ़नें
लगा हा और
सरकार न भी
इस प्रयासों से प्रभावित
होकर अनुदान राशि
५ से बढाकर
१० लाख कर
दी है जो
राजस्थानी सिनेमा का लिए
किसी संजीवनी से
कम नहीं है।
अब या शुभ
संकेत देख कर
आभास होने
लगा है की
अगर ऐसा ही
चलता रहा तो
राजस्थानी सिनेमा फिर से
उन्हीं उचाईयां को छूने
लगेगा और राजस्थानी
सिनेमा के भी अच्छे दिन
आ जायेंगे।