Friday, 6 January 2017

Press Conference RFF 2014

                
                                पहली बार हुई राजस्थानी सिनेमा की दशा एव दिशा पर विशेष परिचर्चा

दो दिवसीय राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में १९ सितम्बर २०१४ को राजस्थानी सिनेमा की दिशा एव दिशा पर पहली बार एक विशेष परिचर्चा राखी गई। जिसमे कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान धरोहर सरक्षण एव प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लाखावत ने की। इस मौके पर लाखावत ने राजस्थानी सिनेमा के विकास की चर्चा की और सिनेमा से जुडी समस्याओं को सरकार तक पहुचाने का आशवासन दिया।

इसके साथ अमरसिंह राठौर, नंदू जालानी, के. सी. मालू तथा सिनेमा से जुड़े कई निर्माता, निर्देशक टेक्निशियनों, कलाकारों और लेखकों ने अपने-अपने विचार प्रकट किया। सभी ने कहा की राजस्थानी सिनेमा को सही दिशा में लेन के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करना होंगे। सिर्फ सरकार या अकेले सिनेमा के लोग कुछनही कर सकते। कार्यक्रम में इस बात पर भी खूब चर्चा हुई की हमारे राजस्थान बेहतरीन लोकेशन्स है और इनका इस्तेमाल बहार का लोग कर जाते है लेकिन lokashan में छूट नहीं होने के कारण राजस्थानी सिनेमा अयस्क उपयोग नई ले पा रहा है, ये चिन्ता का विषय है। इंक साथ-साथ राजस्थानी भाषा  को मान्यता दिलाने की बात पर भी विशेष चर्चा हुई।  


Monday, 28 November 2016

Jury Members Of Rajasthan Film Festival


राजस्थान अपनी कला, संस्कृति, पहनावे, बोलचाल, रहन सहन, खानपान आदि के लिए विश्व्भर में प्रसिद्ध है और हमारी इस सांस्कृति विरासत के प्रचार-प्रचार के लिए सिनेमा सबसे बड़ा माध्यम है।
राजस्थान फिल्म फेस्टिवल भी विगत तीन सालों में हमारी सांस्कृति विरासत को सहेजने का कार्य कर रहा है यह अत्यन्त सराहनीय है लेकिन हमे भी हमारी सिनेमा को ऊपर उठाने के लिए भरसक प्रयास करने चाहिए। हमे उच्च गुणवत्ता, बहेतरीन संगीत, सामाजिक मुददों तथा हमारी कला एवं संस्कृति से जुड़ाव रखने वाली साफ सुथरी फिल्म का निर्माण कर हमारे सिनेमा को नई उचाईया प्रदान करनी चाहिए ताकि हमारा राजस्थानी सिनेमा विश्व पलट पर महक सके।
मैं विगत दो सालों से राजस्थान फिल्म फेस्टिवल के निर्णायक के रूप में भूमिका निभा रहा हूँ इसके लिए में राजस्थान फिल्म फेस्टिवल का आभार व्यक्त करता हूँ साथ ही स्मारिका " नई सोच नई दिशा " के लिए शुभकामनाए प्रेषित करता हूँ।



राजस्थान फिल्म फेस्टिवल का निर्णायक दल

इस निर्णायक दल ने राजस्थान फिल्म फेस्टिवल, २०१५ में निर्णायक के रूप में अहम भूमिका निभाई इसलिए राजस्थान फिल्म फेस्टिवल पं. विशवमोहन भट्ट, फिल्म निर्देशक विक्की राणावत और वरिष्ठ सिनेमेटोग्राफर एस. पप्पू का आभार व्यक्त करता है। 

Wednesday, 19 October 2016

RFF in Blockbuster Magazine

ब्लॉकबस्टर पत्रिका में सम्पादित राजस्थान फिल्म फेस्टिवल २०१४ अवार्ड सेरेमनी की झलकियों में इम्प्पा अध्यक्ष टी.पी. अग्रवाल डीप प्रोज्वलित करते हुए |





Tuesday, 18 October 2016

Rajasthan Film Festival 2014 Clips

फिल्म प्रमोशन पत्रिका में सम्पादित राजस्थान फिल्म फेस्टिवल २०१४ अवार्ड सेरेमनी की झलकियों में तिमप्पा अध्यक्ष टी.पी. अग्रवाल और फिल्म जानकारी संपादक कोमल नाहटा 20 सितम्बर को जयपुर में राजस्थान फिल्म समारोह पुरस्कार नाईट पर एक दूसरे को गले लगाओ।






Wednesday, 24 August 2016

Lifetime Achievement Award - Mohan Katariya

इस बार राजस्थानफिल्म फेस्टिवल में राजस्थानी सिनेमा की बेहतरी के लिया गये कार्यो और राजस्थानी सिनेमा में अभूतपूर्व योगदान के लिया निर्माता,निर्देशक एव अभिनेता श्री मोहन कटारिया को सुभाष घई के हाथो लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया।




मोहन कटारिया विगत तीन दर्शक से राजस्थानी हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय है। अब तक के फ़िल्मी सफर में वे तक़रीबन तीन दर्जन से भी अधिक फिल्में और सीरियल कर चुके है। इनकी प्रमुख राजस्र्थानी फ़िल्मी में बेटी राजस्थानी री,डिग्गीपुरी का राजा,धरती रो धणी, जय करती माता आदि है। इनका आलावा जय श्री श्याम,अपनापन,रिश्ते,सतरंगी लहरियो,तीस मर खां जैसे सीरियल में भी इन्होंने अपने अभिनय की छाप छोड़ी है। हाल ही में आई फिल्म डर्टी पॉलिटिक्स में भी इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभा कर अपने अभिनय की सक्रियता का सबूत दिया है। 

Monday, 8 August 2016

From Rajyavardhan Singh Rathore Desk

राजस्थान फिल्म फेस्टिवल राजस्थानी सिनेमा के लिए सार्थक कदम - राज्यवर्धन  सिंह  राठौर


राजस्थान फिल्म फेस्टिवल २०१५ की अध्य्क्षता सूचना एव प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन  सिंह  राठौर ने की। इस मौके पर उन्होंने खा की यह समारोह राजस्थानी सिनेमा के लिए एक सार्थक कदम है क्योंकि इससे कलाकारों को मंच मिलता है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा की बेशक हमारे यहां छोटे बजट की फिल्में बनतीं  है लेकिन कहानी को सही तरीके से प्रस्तुत किया जाये तो वे भी पूरी दुनिया में अपना परचम लहरा सकती है। सिनेमा के लिए भाषा कतई बाधा; नहीं है। सिनेमा केवल प्रस्तुतिकरण मांगता है अगर वो अच्छा है तो छोटी बात को भी बड़ा होने में वक़्त नए लगता।  राजस्थान ऐसी धरती है जहाँ घर-घर में कहानियां है, उन्हें लेकर अगर फिल्में बनाई जाये तो वे निश्चित्त  रूप  से विश्वभर में कमाल कर सकती है।

मंत्री होने के नाते उन्होंने ये भी कहा की मैं  दूरदर्शन से व्यक्तिगत रूप से गुजारिश करूँगा कि सप्ताह में कम से कम एक दिन राजस्थानी फिल्म का प्रसारण किया जाये और आप भी सरकार को राजस्थानी सिनेमा की बेहतरी के लिया सुझाव दें। आखिर में उन्होंने सभी को शुभकामनाएँ दी।